यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला एक भविष्यवक्ता थे, उनका जन्म एक यहूदी याजक जकरियाह और उनकी पत्नी इलीशिबा के घर हुआ था। यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला यीशु मसीह के संबंधी थे। यूहन्ना ने यरदन नदी के किनारे-किनारे प्रचार किया और लोगों को पापों की माफी मांगने के लिए पश्चाताप और मन फिराव का बपतिस्मा लेने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने यीशु मसीह को भी बपतिस्मा दिया था। और उनकी आने की भविष्यवाणी भी की थी। यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले का साहसिक स्वभाव उन्हें हेरोदेस अन्तिपास की निंदा करने के लिए प्रेरित किया, जिसके परिणामस्वरूप यूहन्ना को गिरफ्तार कर लिया गया था। और बाद में उसे मार भी डाला गया। यूहन्ना ने कठिन और सरल जीवन व्यतीत किया था, ऊँट के बालों से बने हुए वस्त्र पहने और टिड्डियाँ और जंगली शहद ( वनमधु ) खाया।
-:परिचय:- यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला
यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला, जिन्हें बाइबल में अक्सर “John The Baptist” के नाम से भी जाना जाता है, नए नियम में यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला एक प्रमुख भविष्यवक्ता है। यूहन्ना के जीवन और कार्यों के बारे में पवित्र बाइबिल में कई महत्वपूर्ण बातें लिखी गई हैं। इस लेख में उनके बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है।
राजा का संदेशवाहक
यहूदी सोचते थे कि प्रतिज्ञा किए हुए उद्धारकर्ता के बारे में बताने के लिए परमेश्वर एक विशेष भविष्यद्वक्ता भेजेगा। जकर्याह एक याजक था। वह यरूशलेम में मंदिर की वेदी पर धूप जलाता था। एक स्वर्गदूत ने उसे बताया कि उसकी पत्नी एक पुत्र को जन्म देगी। वह एक बड़ा नबी बनेगा। परन्तु जकर्याह और उसकी पत्नी बहुत वृद्ध थे और पुत्र जनने योग्य नहीं थे।
इसलिए जकर्याह ने इस सन्देश पर विश्वास नहीं किया। उसने इस सन्देश की सच्चाई जानने के लिए एक चिन्ह माँगा। स्वर्गदूत ने कहा कि चिन्ह के रूप में जकर्याह उस दिन तक बोल नहीं सकेगा जब तक परमेश्वर का वायदा पूरा नहीं होता।
उसका नाम यूहन्ना रखना
यह एक यहूदी रिवाज़ था कि बच्चों को आदरणीय पारिवारिक सदस्यों का नाम दिया जाता था। यहूदी विचारानुसार एक व्यक्ति का नाम महत्वपूर्ण होता था, क्योकि नाम के द्वारा उस व्यक्ति के बारे में जानकारी प्राप्त होती थी। स्वर्गदूत ने जकर्याह से कहा था कि उसके पुत्र का नाम यूहन्ना होना चाहिए। “यूहन्ना” का अर्थ है “परमेश्वर प्रेम करनेवाला है।”
जब समय पूरा हुआ तो इलीशिबा ने एक पुत्र को जन्म दिया। उसके पड़ोसियों और सम्बन्धियों ने उसके प्रति परमेश्वर की भलाई के बारे में सुना। वे भी बहुत प्रसन्न हुए।
जब शिशु एक सप्ताह का हुआ, तो उन्होंने उस का नाम उसके पिता के सम्मान में जकर्याह रखना चाहा। परन्तु उसकी माँ ने कहा, “नहीं! इसका नाम यूहन्ना होगा।”
उन्होंने उस से कहा, “परन्तु तुम्हारे परिवार में किसी का भी यह नाम नहीं है! “फिर संकेतो से उन्होंने उसके पिता से नाम बताने के लिए कहा! जकर्याह ने लिखने के लिए कुछ माँगा। उसने लिखा “इसका नाम यूहन्ना है!” उसी समय जकर्याह बोलने योग्य हो गया।
वह परमेश्वर की स्तुति करने लगा। सारे पड़ोसी अचम्भित हो गए। यहूदिया के पहाड़ी प्रदेश लोग इस विषय में बात करने लगे। प्रत्येक पूछने लगा, “यह बालक कैसा होगा ?” वे देख सकते थे कि वह बालक परमेश्वर की ओर से एक विशेष वरदान था। लूका 1:57 -66
यूहन्ना के पिता द्वारा परमेश्वर की स्तुति
पवित्र आत्मा ने यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले के पिता, जकर्याह के द्वारा ये शब्द कहे; “हे इस्राएल के लोगों, हम परमेश्वर की प्रशंसा स्तुति करे! क्योकि वह हमारी सहायता करने आया है। उसने अपने सेवक राजा दाऊद परिवार से हमे एक महान उद्धारकर्ता दिया है। परमेश्वर के सभी नबियों ने हमारे पूर्वजों से यह’कहा था। परमेश्वर ने कहा वह अपनी प्रतिज्ञा स्मरण रखेगा। वह लोगों को उनके शत्रुओ से बचाएगा। और फिर वे बिना भय के रह सकेंगे और हर बात में उसकी आज्ञा पालन करेंगे।
तू हे बालक, परम प्रधान का नबी होगा। तू प्रभु का मार्ग तैयार करेगा।
बालक बलवंत और बुद्धिमान होता गया। वह तक रेगिस्तान में ही रहा जब तक इस्राएलियों को परमेश्वर का सन्देश निकला।
तू उसके लोगों को बचाएगा कि वह उनके पाप क्षमा करके उन्हें बचा लेगा।
हमारा परमेश्वर उन्हें बचा लेगा। हमारा परमेश्वर भला और प्रेमी है।
उसका उद्धार हम पर ज्योति के समान चमकेगा। यह उन सब के लिए प्रकाश होगा।
जो मृत्यु के भय में जीवन बिताते हैं। वह हमें शांति का मार्ग दिखाएगा।”

यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला के द्वारा यीशु का बपतिस्मा
1. जन्म और परिवारिक पृष्ठभूमि
- यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले का जन्म यहूदी याजक जकरियाह और उनकी पत्नी इलीशिबा के घर हुआ था। बाइबल हमें बताती है, कि यूहन्ना का जन्म चमत्कारिक रूप से हुआ था। क्योंकि यूहन्ना की माता इलीशिबा वृद्धावस्था में थीं और बाँझ भी मानी जाती थीं।
- यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले का संबंध प्रभु यीशु मसीह से भी था, क्योंकि इलीशिबा और प्रभु यीशु की माँ मरियम आपस में संबंधी थीं।
2. बचपन और प्रारंभिक जीवन
- यूहन्ना ने अपना शुरूआती जीवन रेगिस्तान में बिताया था, जहाँ पर यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला एक कठोर जीवन शैली अपनाते थे। यूहन्ना ने ऊँट के बालों से बने हुए वस्त्र पहने और टिड्डियाँ और जंगली मधु खाया और अपना जीवन यापन किया।
3. प्रचार और बपतिस्मा
- यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला यहूदिया के रेगिस्तान में प्रचार किया करता था, और सारे लोगों को उनके पापों की माफी के लिए पश्चाताप करने और मन फिराव बपतिस्मा लेने का संदेश दिया। और लोगों ने पश्चाताप किया और यूहन्ना ने उन्हें नदी यरदन में बपतिस्मा दिया।
- यूहन्ना का संदेश मुख्यतः यह था कि “स्वर्ग का राज्य निकट आ गया है” और लोगों को अपने पापों से पश्चाताप करके फिराकर सही मार्ग पर चलने के लिए प्रोत्साहित करना।
4. यीशु मसीह के साथ संबंध
- यूहन्ना ने प्रभु यीशु को भी बपतिस्मा दिया था, जिसे नए नियम में एक महत्वपूर्ण घटना माना जाता है। यह घटना प्रभु यीशु मसीह के सार्वजनिक और सेवकाई जीवन की शुरुआत मानी जाती है।
- यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला यीशु को “परमेश्वर का मेमना” कहा था। और यीशु मसीह के आने की भविष्यवाणी भी की।
5. न्यायिक और साहसिक स्वभाव
- यूहन्ना ने हेरोदेस अन्तिपास, जो यहूदिया का राजा था, उसकी निंदा की थी। क्योंकि हेरोदेस ने अपने भाई की पत्नी हेरोदियास से विवाह किया था,और उसे अपनी पत्नी बना लिया था। जो कि अनैतिक माना जाता था। इसके कारण राजा हेरोदेस ने यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले को गिरफ्तार कर लिया। और अंततः यूहन्ना की हत्या करवा दी।
6. यूहन्ना की मृत्यु
- राजा हेरोदेस के आज्ञा पर यूहन्ना का सिर काट दिया गया था। यह घटना राजा हेरोदेस के जन्मदिन के उत्सव के दौरान हुई, जब हेरोदियास की बेटी सलोमे ने नृत्य करके राजा हेरोदेस को प्रसन्न किया था, और अपनी माँ के कहने पर उसने यूहन्ना का सिर को माँगा।
यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले और उसका का जीवन, और संदेश और शिक्षाएँ आज भी कलीसिया में अत्यधिक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक हैं।
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