याकूब और एसाव की कहानी | Jacob And Esau Story

याकूब और एसाव की कहानी | Jacob And Esau Story

दोस्तों, Yeshu Aane Wala Hai Blog मैं स्वागत है। आज हम इस लेख के माध्यम से पढ़ने जा रहे हैं, याकूब और एसाव की कहानी। आज के इस लेख में मैं आप लोगों को बताने जा रहा हूं, याकूब और एसाव की कहानी | Jacob And Esau Story इस कहानी में मैं आपको बताऊंगा, कि कैसे याकूब ने अपने पिता को धोखा दिया, याकूब द्वारा सपने में स्वर्ग तक एक सीढ़ी का देखा जाना, और याकूब का परमेश्वर के साथ मल्लायुद्ध करना। इन सारी घटनाओं को आज के इस लेख के माध्यम से मैं आप तक पहुंचाने जा रहा हूं, इसलिए आप इस लेख को पूरा जरूर पढ़े, ताकि आप इन बातों को और भी अच्छे रीति से समझ पाए। तो आइये शुरू करते हैं।

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याकूब और एसाव की कहानी | Jacob And Esau Story

याकूब और एसाव की कहानीउन दिनों में यह प्रथा थी कि पहिलौठे पुत्र को पिता की अंतिम आशीष मिलती थी। पिता की मृत्यु के बाद उसे पारिवारिक संपत्ति का 2/3 भाग मिलता था। परिवार के लिए सभी आवश्यक निर्णय वही लिया करता था। यह सभी कार्य बड़े पुत्र के अधिकार में हुआ करते थे।

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याकूब और एसाव का जन्म | Birth of Jacob and Esau

इसहाक की पत्नी रिबका का जनने का समय आया और उसके जुड़वा बच्चे हुए। पहला वाला बालक लाल रंग का था। और उस बालक के शरीर पर सब जगह बाल ही बाल थे। उस बालक का नाम एसाव रखा गया। जिसका अर्थ होता है ” रोंआर “ या बालों वाला। दूसरा बालक एसाव की एड़ी पकड़े हुए उत्पन्न हुआ था। इस दूसरे बालक का नाम याकूब रखा गया, जिसका अर्थ होता है, ” धोखेबाज “। जब यह दोनों बालक उत्पन्न हुए उस समय इसहाक 60 वर्ष का था। उत्पत्ति 25:24-26,

याकूब और एसाव दोनों एक साथ बढ़ने लगे। एसाव तो जंगलों को पसंद करता था और आगे चलकर वह एक अच्छा शिकारी भी बना। प्रिया को एक शांत मनुष्य था जो घर पर ही रहता था। इसहाक एसाव को तो चाहता था क्योंकि उसे एसाव द्वारा शिकार किए हुए जानवरों का मांस खाना अच्छा लगता था। पर रिबका तो याकूब को पसंद करती थी। उत्पत्ति 25:27-28,

एसाव ने अपना पहिलौठे का अधिकार को बेच दिया

एक दिन जब याकूब दाल पका रहा था, एसाव शिकार पर से आया और याकूब से कहने लगा, मुझे बहुत भूख लगी है। इस लाल वास्तु में से मुझे कुछ खाने को दे। याकूब ने एसाव को उत्तर दिया, तुझे ये खाने को मिल सकता है, लेकिन तुझे अपना पहिलौठे का अधिकार मुझको देना होगा। एसाव ने कहा, मैं बहुत भूखा हूँ। मैं तो मरने पर हूँ! मुझे अपने अधिकारों की कोई चिंता नहीं है। मुझे तो तू दाल खिला दे।

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याकूब ने एसाव को उत्तर दिया, पहले प्रतिज्ञा कर कि तू मुझे अपना पहिलौठे अधिकार देगा। फिर मैं तुझे दाल खाने को दूंगा। इस प्रकार एसाव ने प्रतिज्ञा की और अपने अधिकार को याकूब को बेच दिया।

तब याकूब ने उसे कुछ रोटी और दाल खाने को दिया। और एसाव ने खाया और पीया और फिर चला गया। इस प्रकार एसाव ने अपना पहिलौठे का अधिकार अपने छोटे भाई याकूब को दे दिया। उसने अपने अधिकारों की कुछ भी चिंता नहीं की। उत्पत्ति 25:29-34,

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याकूब और एसाव की कहानी | Jacob And Esau Story

याकूब द्वारा अपने पिता को धोखा देना | Jacob Betrays His Father

इसहाक के लिए अपने पहिलौठे पुत्र को अपनी मृत्यु से पहले आशीष देना आवश्यक था। यदि वह ऐसा करता तो उसके पुत्र को सब प्राप्त हो जाता जिसे परमेश्वर ने इस्साक की संतान को देने की प्रतिज्ञा की थी।

 

इसहाक का एसाव को बुलाया जाना आशीष देने के लिए

इसहाक ने एसाव को अपने पास बुला कर कहा अब मैं बूढ़ा और अंधा हो गया हूं। उसने एसाव को, जो उसका पहिलौठा पुत्र था, कहा, तू देखता है कि मैं बूढ़ा हो गया हूं। हो सकता है मैं बहुत दिनों तक जीवित ना रहूं। इसलिए जा और मेरे लिए एक जानवर का शिकार करके ला। जैसा मुझे पसंद है, और उसे पका, और फिर मेरे पास ले आ। मैं उसे खाऊंगा, और इससे पहले कि मैं मर जाऊं मैं अपनी अंतिम आशीष तुझे दूंगा। उत्पत्ति 27:1-4,

 

रिबका के द्वारा याकूब को भड़काया जाना

जिस समय इसहाक एसाव से बात कर रहा था, रिबका सुन रही थी। इसलिए जब एसाव शिकार के लिए बाहर गया, तो रिबका ने याकूब से कहा, मैंने तेरे पिता को अभी एसाव को यह कहते सुना है, मेरे लिए एक जानवर ला और मैं उसे पका और मैं उसे खाकर मरने से पहले तुझे अपनी अंतिम आशीष दूंगा। रिबका ने ने याकूब से कहा, अब हे मेरे पुत्र, मेरी बात सुन जो मैं कहती हूं। भेड़शाला में जा और वहां से बकरी के 2 बच्चे ले या। मैं तेरे पिता की पसंद का भोजन तैयार करूंगी। और फिर तू वह भोजन लेकर अपने पिता के पास जाना। तब वह मरने से पहले तुझे अंतिम आशीष देगा। उत्पत्ति 27:5-10,

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याकूब द्वारा अपने मां रिबका को उत्तर देना, याकूब ने अपने मां से कहा की मां एसाव के शरीर पर बहुत सारे बाल हैं परंतु मेरी त्वचा चिकनी है। मेरे पिता देख नहीं सकते लेकिन मुझे छू सकते हैं और उसे पता चल जाएगा कि मैं उसे धोखा दे रहा हूं। इस प्रकार से तो मैं आशीष के बदले अपने ऊपर श्राप ले आऊंगा।

आगे की कहानी Page No. 2 में दिया गया है।

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