दोस्तों, आप सभी का हमारे एक और लेख के माध्यम से Yeshu Aane Wala Hai Blog मैं स्वागत है। आज के इस लेख के माध्यम से हम जानने वाले हैं, कलीसिया की स्थापना, Church Establishment. इसके बारे में हम जानेगे। की कैसे कलीसिया के बनने से पहले ही इसके बारे में भविष्यवाणी की गई थी। कौन कौन से भविष्यवक्ताओं ने भविष्यवाणी की थी? इन सारी बातों को आज इस लेख के माध्यम से मैं आप तक पहुंचाने जा रहा हूं। इसलिए इस लेख को पूरा जरूर पढ़ें, ताकि आप इन बातों को और अच्छे से समझ सके। धन्यवाद
कलीसिया क्या है? | What is the church?
कलीसिया साधारण तौर पर लोगों की एक मंडली या जमायत है, जिसे एक विशेष उद्देश्य और उद्धार के लिए बुलाया गया है। परमेश्वर की कलीसिया उन लोगों से मिलकर बनी हुई एक मंडली है जो प्रभु यीशु मसीह में विश्वास करते हैं तथा उसकी शिक्षाओं पर चलते हुए उसकी इच्छा को मानते हैं।
कलीसिया की स्थापना बारे में भविष्यवाणियां
कई वर्षों पहले कलीसिया की स्थापना के विषय में भविष्यवक्ताओं के द्वारा भविष्यवाणी की गई थी, और इन भविष्यवक्ताओं के नाम थे यशायाह, योएल, तथा दानिय्येल। उन्होंने यह बताया था की, कलीसिया की स्थापना कहां होगी और कौन इसे स्थापित करेगा, कब इसकी स्थापना होगी तथा इसकी स्थापना का उद्देश्य क्या होगा।

कलीसिया के लिए यशायाह की भविष्यवाणी
कलीसिया की स्थापना के बारे में यशायाह भविष्यवक्ता ने कहा था, “किअंत के दिनों में ऐसा होगा कि यहोवा परमेश्वर के भवन का पहाड़ सब पहाड़ों पर दृढ़ किया जाएगा, और सब पहाड़ियों से अधिक ऊंचा किया जाएगा, और हर एक जाति के और कुल के लोग धारा की नाइ इसकी और चलेंगे। और बहुत देश के लोग आएंगे, और आपस में कहेंगे, आओ हम यहोवा के पर्वत पर चढ़कर याकूब के परमेश्वर के भवन में जाएं; तब वह हमको अपना मार्ग सिखाएगा और हम उसके रास्तों पर चलेंगे क्योंकि यहोवा परमेश्वर की व्यवस्था सिय्योन से और उसका वचन यरूशलेम से निकला है।” ( यशायाह 2:2-3 )
कलीसिया के लिए योएल की भविष्यवाणी
योएल भविष्यवक्ता ने कलीसिया की स्थापना के बारे में भविष्यवाणी किया था। जैसे कि लिखा है, ” उन बातों कि बाद मैं सब प्राणियों पर अपना पवित्र आत्मा उडेलूँगा, तुम्हारे बेटे और बेटियां भविष्यवाणी करेंगे, और तुम्हारे पुरनिये लोग स्वप्न देखेंगे, और तुम्हारे जवान बच्चे दर्शन देखेंगे। और तुम्हारे दास और दासियों पर भी मैं उन अंत के दिनों में अपना आत्म उदय उडेलूँगा । ( योएल 2:28-29 )
कलीसिया के लिए दानिय्येल की भविष्यवाणी
दानिय्येल भविष्यवक्ता ने भी अपने भविष्यवाणी के द्वारा कलीसिया की स्थापना के बारे में लिखा है। ” और उन राजाओं के दिनों में स्वर्ग का परमेश्वर, एक ऐसा राज्य उदय करेगा जो अनंत काल तक न टूटेगा, और ना वह किसी दूसरी जाति के हाथ में किया जाएगा। ( दानिय्येल 2:44 )
नए नियम में कलीसिया के लिए भविष्यवाणी
बहुत सी और भी भविष्यवाणी है जो हम पुराने नियम में देख सकते हैं परंतु अब हम नए नियम में यीशु मसीह के द्वारा कलीसिया की स्थापना के बारे में की गई भविष्यवाणियों को देखेंगे। जब यीशु मसीह ने कलीसिया के विषय में कुछ प्रतिज्ञा की थी। तो यीशु ने कहा था,” और मैं भी तुझसे कहता हूं कि तू पतरस है; और मैं इस पत्थर पर अपनी कलीसिया बनाऊंगा और अधुलोक के फाटक उसे पर प्रभुता या प्रबल ना होंगे। ” ( मत्ती 16:18 )
इस बात पर ध्यान दीजिए कि कलीसिया की स्थापना अभी हुई नहीं थी बल्कि प्रभु यीशु मसीह ने भविष्य में कलीसिया की स्थापना होगी इसके विषय में भविष्यवाणी की थी। पतरस ने जब यह अंगीकार कर लिया कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है, तब यीशु ने कहा, ” है शमोन योना के पुत्र, तू धन्य है क्योंकि मांस और लहू ने नहीं, परंतु मेरे पिता ने जो स्वर्ग में है यह बात तुझ पर प्रकट की है।” ( मत्ती 16:17 )

नए नियम में कलीसिया की स्थापना
जब हम प्रेरितों के काम 2 अध्याय की ओर आते हैं तब हम वहां कलीसिया की स्थापना के विषय में पढ़ सकते हैं। पिन्तेकुस्त के दिन पवित्र आत्मा उतरा था, और प्रेरितों के ऊपर पवित्र आत्मा उतरा था। और तब उन प्रेरितों के पास यह समर्थ आई की बी अन्य अन्य भाषाओं में बोलने लगे थे तथा आश्चर्य कर्म कर रहे थे।
यह वह बात है जो योएल भविष्यवक्ता के द्वारा कही गई थी। प्रेरितों के काम 2:16, कि किस प्रकार से पवित्र आत्मा सब लोगों पर अंडेला जाएगा और परमेश्वर का राज्य समर्थ के साथ आएगा। एक ऐसा राज्य स्थापित होगा जो कभी समाप्त नहीं होगा। पौलुस ने इब्रानियों 12:28, में कहा था कि यह एक ऐसा राज्य है जो हिलने का नहीं। वह कलीसिया या राज्य अभी भी कायम है और सदा के लिए स्थिर रहेगा। और यहां पर दानिय्येल 2:44, बाली भविष्यवाणी भी पूरी होती है।
नए नियम में यशायाह की भविष्यवाणी पूरी हुई
कलीसिया की स्थापना के बारे में हम देखते हैं कि यशायाह 2:2-3, वाली भविष्यवाणी पूरी होती है अर्थात पिन्तेकुस्त के दिन कलीसिया की स्थापना होना। कलीसिया की स्थापना का स्थान था ‘ यरूशलेम ‘ और समय था लगभग 33 ई, सन। राज्य अर्थात कलीसिया की स्थापना हो चुकी थी। सुसमाचार का प्रचार किया जा रहा था तथा जिन लोगों ने सुसमाचार पर विश्वास करके उसको मानकर बपतिस्मा प्रभु के द्वारा उसकी कलीसिया या राज्य में मिले गए थे। प्रेरितों के काम 2:47,
नए नियम में प्रभु यीशु मसीह ने कहा था। कि वह अपनी कलीसिया बनाएगा मत्ती 16:18, और उसने यह सब अपने प्रेरितों के द्वारा किया। हम यह भी देखते हैं की कलीसिया की नींद प्रभु यीशु मसीह स्वयं है। 1 कुरिन्थियों 3:11,
कलीसिया की स्थापना मनुष्य ने नहीं की
कलीसिया की स्थापना मनुष्य ने नहीं की यूहन्ना और पतरस ने कलीसिया को नहीं बनाया परंतु प्रभु यीशु मसीह ने कलीसिया की स्थापना की और उसको बनाया। आज हम जिस कलीसिया में जाते हैं या किसी कलीसिया का सदस्य होना चाहते हैं? वह यीशु मसीह की कलीसिया है। आज बहुत सारी ऐसी कलीसियाएं हैं जिसे यीशु मसीह ने नहीं बनाया परंतु मनुष्य ने बनाया है, ऐसी कलीसियाओं को पहचानना और उससे अलग रहना हर एक विश्वासी के लिए जरूरी है। ऐसी कलीसियाओं की पहचान यह है कि वहां पर वचन के अनुसार कार्य नहीं होता और ना यीशु के अधिकार से कोई काम किया जाता है।
मनुष्यों के द्वारा बनाई हुई कलीसिया
आज के समय में संसार में बहुत सारी कलीसियाएं विद्यमान है जिन्हें परमेश्वर ने नहीं परंतु मनुष्य ने बनाया है। इन कलीसियाओं के अपने-अपने नियम है। जहां पर मनुष्य के सोच विचार के अनुसार कार्य किए जाते हैं बाइबल के अनुसार नहीं। जबकि हम जानते हैं कि बाइबल ही एक ऐसा माध्यम है जो कि परमेश्वर के साथ चलने के लिए हमारी मदद करती है और हमें एक सच्ची कलीसिया बनने में सहायता करती है।

यीशु मसीह की कलीसिया
यीशु मसीह की अपनी एक कलीसिया है जो की सच्ची कलीसिया है और यीशु मसीह उसका सर है, जहां पर बाइबल के अनुसार सारे काम किए जाते हैं और बाइबल के अनुसार ही शिक्षाएं दी जाती हैं। (कुलुस्सियों 1:18,)
कलीसिया का सर कोई पोप या अन्य धार्मिक अजूबा नहीं हो सकता है। केवल यीशु मसीह ही हमारा उद्धार करता और कलीसिया का सिर है। (इफिसियों 5:23,) प्रभु यीशु मसीह ही एकमात्र नेव है, जैसा ( 1 कुरिन्थियों 3:11 ) में लिखा है।
संसार में जितनी भी कलीसियाएं पवित्र बाइबल के अनुसार चलाई जाती हैं वे सब के सब काली सी आय यीशु मसीह की कलीसिया है। ( रोमियो 16:16 ) और एक दिन प्रभु यीशु मसीह अपनी कलीसिया को लेने के लिए फिर से इस संसार में वापस आएंगे। ( इफिसियों 5:27 ) कलीसिया की स्थापना के बारे में इन सारी बातों को जानने के बाद अगर हम ऐसी कलीसियाओं के सदस्य हैं जो मनुष्य की शिक्षाओं पर आधारित है, तो आज ही हमें बाइबल के अनुसार यीशु की कलीसिया के सदस्य होने की जरूरत है।हमारे पास एक सु-अवसर है कि हम यीशु मसीह की कलीसिया के सदस्य बन सकें।
सच्ची कलीसिया को कैसे पहचाने?
अब हम किस प्रकार से पहचान सकते हैं एक सच्ची कलीसिया जो कि प्रभु यीशु मसीह की कलीसिया है? मनुष्य के द्वारा बनाई गई कलीसियाओं तथा यीशु द्वारा बनाई गई कलीसिया में क्या भिन्नता है? यदि किसी कलीसिया में पिता पुत्र और पवित्र आत्मा के बारे में शिक्षा नहीं है तो वह यीशु की कलीसिया नहीं है। यदि कोई केवल यीशु मसीह के नाम से कलीसिया को चलना है तो वह यीशु की कलीसिया नहीं है। और यदि कोई केवल परमेश्वर पिता के नाम से कलीसिया को चलना है तो वह कलीसिया यीशु मसीह की नहीं है।
यह कुछ मुख्य पहचान है जिससे हम आसानी से एक सच्ची कलीसिया जो यीशु की कलीसिया है और एक मनुष्य की कलीसिया जो की यीशु की नहीं है इन दोनों में अंतर कर सकते हैं।यदि कोई कलीसिया नए नियम को अपना संपूर्ण रूप से अधिकार नहीं मानती तब वह यीशु के पीछे चलने वाली कलीसिया नहीं रही। पौलुस ने कहा था कि एक ही कलीसिया और एक ही देह है। ( इफिसियों4:4 )
FAQ
Ques – 1 कलीसिया का मतलब क्या होता है?

Ans. सही मायने में कलीसिया का अर्थ होता है लोगों का समूह या सभा। कलीसिया प्रभु येशु मसीही पर विश्वास करने वालों के समूह को कहते हैं। जिन्हें संसार ईसाई लोग भी कहते है। कलीसिया में विश्वासी लोग यह मानते हैं कि ( स्वर्ग और पृथ्वी को बनाने वाले परमेश्वर का, मनुष्य के रूप में इस संसार में आये थे। और अपना बलिदान पुरुष पर देकर मनुष्य जाति का उद्धार करता बन गए थे।) इस विषय में और अधिक जानकारी के लिए हमारे वेबसाइट पर जाएं।
Ques – 2 चर्च और कलीसिया में क्या अंतर है?

Ans. चर्च और कलीसिया दोनों एक ही बात है इन दोनों में कुछ भी अलग नहीं है फर्क सिर्फ इतना है की अंग्रेजी में चर्च कहा जाता है और हिंदी में कलीसिया। लेकिन इन दोनों में एक बात है जो विशेष रूप से ध्यान रखने वाली बात है की कलीसिया या चर्च किसी भवन या बिल्डिंग को नहीं कहा जाता बाइबल के अनुसार यह दोनों परमेश्वर के लोगों के संगति के स्थान को या जहां पर पवित्र लोग एकत्र है उन पवित्र लोगों को कहा जाता है।
Ques – 3 कलीसिया का उद्देश्य क्या है?

Ans. जब हम बात करते हैं कलीसिया का उद्देश्य के बारे में तो यह परमेश्वर का एक कार्य है जो परमेश्वर ने अपने लोगों को लिए दिया है। “कि परमेश्वर के कलीसिया के द्वारा परमेश्वर का विभिन्न प्रकार का ज्ञान उन सब प्रधानों और अधिकारियों पर प्रकट किया जाए” (इफिसियों 3:10) यदि हम सन्दर्भ पर ध्यान दें तो इफिसियों 3 अध्याय में पौलुस बताता है कि परमेश्वर ने एक रहस्य को प्रकाशित किया है।
Ques – 4 कलीसिया की स्थापना कब हुई थी?

Ans. कलीसिया की स्थापना के बारे में अगर हम बात करें तो बाइबल में इसके विषय में साफ-साफ लिखा गया है कि कलीसिया की स्थापना पिन्तेकुस्त के दिन की गई थी, जब परमेश्वर का पवित्र आत्मा उनके पवित्र लोगों पर उतरा और बहुत सारे लोगों ने कलीसिया में शामिल होकर बपतिस्मा लिया। इसका सही समय लगभग लगभग 33 ई, सन है।




