योना नबी की कहानी | Story of Jonah Nabi

योना नबी की कहानी | Story of Jonah Nabi

दोस्तों, आप सभी का हमारे एक और लेख के माध्यम से  Yeshu Aane Wala Hai Blog मैं स्वागत है। आज के इस लेख के माध्यम से हम जानने वाले हैं, योना नबी की कहानी | Story of Jonah Nabi. आज इस कहानी में मैं आपको बताने जा रहा हूं, एक ऐसे भविष्यवक्ता के बारे में जोकि आज्ञा ना मानने वाला है एक भविष्यवक्ता था। परमेश्वर की आज्ञा ना मानने के कारण उस नबी को बहुत सारे मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

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जैसे वह समुद्र के पानी में फेंका गया, एक बड़े मछली ने उसको खा लिया। और फिर परमेश्वर ने उसको एक और मौका दिया था। कि वह उस काम को कर सके, जो परमेश्वर उससे चाहते थे। और इस भविष्यवक्ता ने ऐसा ही किया परमेश्वर की इच्छा को पूरा किया। इन सारी बातों को आज इस लेख के माध्यम से मैं आप तक पहुंचाने जा रहा हूं। इसलिए इस लेख को पूरा जरूर पढ़ें, ताकि आप इन बातों को और अच्छे से समझ सके। धन्यवाद

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योना नबी का परिचय | Introduction to Jonah Nabi

ईसा पूर्व लगभग आठवीं शताब्दी में इस्राएल देश के उत्तरी राज्य में एक नबी रहा करता था। जिसका नाम योना था। और उसके नाम का अर्थ “कबूतर” था योना के पिता का नाम अमितै था। (2 राजा 14:25) । जिस समय योना नबी किया करते थे, उस समय इस्राएल देश संकट में था। (2 राजा 14:26, 27)। परंतु परमेश्वर ने इस्राएल देश को संकट में नहीं छोड़ा लेकिन उन्हें उस संकट में से बाहर निकाला।

योना नबी 12 छोटे नबियों में से एक था। और योना की किताब एक कथात्मक रूप में ही लिखी गई है। जिसमें इस प्रकार से बताया गया है, कि परमेश्वर ने योना को एक आज्ञा दी थी। कि वह नीनवे (असीरिया की राजधानी ) के निवासियों को उनके दुष्टता के विषय में चेतावनी दे। कि वो पश्चाताप करें, और पाप से मन फिराकर परमेश्वर के आज्ञा को माने। अन्यथा परमेश्वर नीनवे को उलट देगा (योना 1: 1-2 और 3:4,)। लेकिन योना नबी ने परमेश्वर की आज्ञा का पालन नहीं किया। और योना नीनवे जाने की वजह दक्षिण की ओर तर्शीश शहर भाग जाना चाहा। वो शहर नीनवे से दूसरी दिशा में लगभग 2,500 मिल से भी अधिक था।

 

योना नबी की कहानी | Story of Jonah Nabi

योना नबी नीनवे क्यों नहीं जाना चाहता था

परमेश्वर ने अपने नबी योना से कहा था कि वह जाकर नीनवे के लोगों को परमेश्वर का संदेश दे। उस समय नीनवे नगर अश्शूर की राजधानी था। यह देश इस्राएल देश का भी शत्रु था। इस बात को जाते हुए, और नीनवे के लोगों की दुष्टता को जानते हुए, योना वहां नहीं जाना चाहता था। योना के काफी कोशिशों के बाद भी परमेश्वर ने उसे नीनवे शहर तक पहुंचा ही दिया। और अंत में योना को यह पता चला, कि परमेश्वर कैसे सभी लोगों से प्रेम करते हैं, और उनकी चिंता भी करते हैं।

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योना नबी की कहानी विस्तार से | Story of Jonah Nabi in detail

योना नबी की कहानी में को जब हम पढ़ते है तो हमें बहुत सारी बातें पता चलती है। जैसे परमेश्वर मनुष्य को उनकी दुष्टता के कारण नष्ट करना नहीं चाहते, परंतु पश्चाताप करने का मौका देते हैं। और जो पश्चाताप करता है उसे क्षमा भी करते हैं। और परमेश्वर ने जिसे अपने काम के लिए चुना है, उससे परमेश्वर अपना काम भी करवा लेते हैं। जैसे कि योना को परमेश्वर ने चुना नीनवे को बचाने के लिए परंतु योना वहां जाना नहीं चाहता था। लेकिन परमेश्वर ने उसे वहां भेजा और वहां के लोगों को बचाया।

 

परमेश्वर ने योना को नीनवे जाने को कहा

एक दिन परमेश्वर ने योना से बातचीत की। और परमेश्वर ने योना से कहा, उस बड़े नगर नीनवे को जा और वहां रहने वाले लोगों से यह कहे कि अगर वे अपने बुरे मार्गो पर चलना ना छोड़े तो मैं उन्हें दंडित करूंगा। परंतु योना ने चाहा कि वह परमेश्वर से दूर भाग जाए। ताकि उसे उस बड़े नगर नीनवे को ना जाना पड़े। इसलिए वह दूसरी दिशा की ओर चला गया।

योना नबी याफा नगर से तर्शीश ( स्पेन ) की ओर जाने बाला एक जहाज लिया। परंतु परमेश्वर ने एक बड़ी आंधी भेजी! वह आंधी इतनी तेज थी कि जहाज के टूटने का खतरा उत्पन्न हो गया था। जहाज को चलाने वाले डर गए और सहायता के लिए चिल्लाने लगे। हर एक ने अपने अपने देवता को पुकारा। फिर उन्होंने समुद्र में सामान सेकर जहाज को हल्का करने का कोशिश किया। इस समय तक यू ना जहाज के निचले भाग में सो रहा था।

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जहाज के मांझी का योना से विनती

जब योना जहाज के निचले स्थान में सो रहा था। तो जहाज के मांझी ने नीचे जाकर योना से कहा, उठो तुम क्यों सो रहे हो? क्या तुम्हें नहीं पता कि समुद्र में बहुत बड़ी आंधी आई है, और हम सब डूबे जा रहे हैं। उठो और मदद के लिए अपने परमेश्वर को पुकारो। संभव है कि तुम्हारा परमेश्वर तुम्हारी पुकार सुनकर हम सबों को बचा लेगा। (योना 1:1-6,)

योना नबी की कहानी | Story of Jonah Nabi

 

योना को समुद्र में फेंका जाना | The Jonah being thrown into the sea

जब जहाज पर सवार लोगों को यह लगा कि उनके देवता उनकी प्रार्थना को नहीं सुन रहे हैं, उनके देवताओं से क्रोधित हैं। तब वह कहने लगे आंधी अब नहीं रुक रही है, और बढ़ती ही जा रही है, तो उन लोगों ने आपस में यह विचार किया। आओ हम चिट्ठी डालकर यह जान ले कि यह विपत्ति किसके कारण आई है। नाविकों ने एक दूसरे से कहा, आओ हम चिट्टियां डालकर इस बात का पता लगाएं कि किसने हमको इस महा संकट में डाला है। और उन्होंने फिर वैसा ही किया सबके नाम का चिट्ठी लिखकर डाला, और योना के नाम पर चिट्ठी निकली।तब उन्होंने उससे कहा हमें बता की किसके कारण यह विपत्ति हम पर पड़ी है? तुम यहां पर क्या कर रहे हो? तुम किस देश के हो?

 

इससे आगे की कहानी Page No. 2 में दिया गया है।

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